सुनहरी भोर लिक्खा है सुहानी शाम लिक्खा है।
कभी तितली के पंखों पर तुम्हे पैगाम लिखा है।।
मेरी साँसों में अक्सर ही जो आ कर के महकती है।
हवाओं के बदन पर भी तुम्हारा नाम लिक्खा है।।।
मोहब्बत करने वाले कम न होंगे तिरी महफ़िल में लेकिन हम न होंगे मोहब्बत करने वाले कम न होंगे ----- ज़माने भर के ग़म या इक तिरा ग़म ये ग़म होगा तो कितने ग़म न होंगे तिरी महफ़िल में लेकिन हम न होंगे मोहब्बत करने वाले कम न होंगेss ----- अगर तू इत्तिफ़ाक़न मिल भी जाए तिरी फ़ुर्क़त के सदमे कम न होंगे तिरी महफ़िल में लेकिन हम न होंगे मोहब्बत करने वाले कम न होंगेss ----- दिलों की उलझनें बढ़ती रहेंगी अगर कुछ मशवरे बाहम न होंगे तिरी महफ़िल में लेकिन हम न होंगे मोहब्बत करने वाले कम न होंगेss ----- 'हफ़ीज़' उन से मैं जितना बद-गुमाँ हूँ वो मुझ से उस क़दर बरहम न होंगे तिरी महफ़िल में लेकिन हम न होंगे मोहब्बत करने वाले कम न होंगेss ----- - हफ़ीज़ होशियारपुरी फुरकत - दूरी, विरह बाह्यम - मिलजुलकर, आपस मे बदगुमा- खराब, निकम्मा बरहम - तितर बितर, इधर उधर
KHUDA KARE KI MOHABBAT ME_TASLEEM FAZLI ख़ुदा करे कि मोहब्बत में ये मक़ाम आए - २ किसी का नाम लूँ लब पे तुम्हारा नाम आए ख़ुदा करे कि मोहब्बत में ये मक़ाम आए ख़ुदा करे ss ---- कुछ इस तरह से जिए ज़िंदगी बसर न हुई - २ तुम्हारे बा ' द किसी रात की सहर न हुई सहर नज़र से मिले ज़ुल्फ़ ले के शाम आए किसी का नाम लूँ लब पे तुम्हारा नाम आए ख़ुदा करे कि मोहब्बत में ये मक़ाम आए ख़ुदा करे ss ---- ख़ुद अपने घर में वो मेहमान बन के आए हैं सितम तो ये है कि अंजाम बन के आए हैं हमारे दिल की तड़प आज कुछ तो काम आए किसी का नाम लूँ लब पे तुम्हारा नाम आए ख़ुदा करे कि मोहब्बत में ये मक़ाम आए ख़ुदा करे ss ---- वही है साज़ वही गीत है वही मंज़र हर एक चीज़ वही है नहीं हो तुम वो मगर उसी तरह से निगाहें उठें सलाम आए किसी का नाम लूँ लब पे तुम्हारा नाम आए ख़ुदा करे कि मोहब्बत में ये मक़ाम आए ख़ुदा करे ss ---- शायर: तस्लीम फ़ाज़ली / स्वर: मेहंदी हसन
GHAMO KI BHEED KHADI HAI_CHANDAN DAS_ शराब ग़म की दवा है शराब पीने दे , ज़माना मुझसे ख़फ़ा है , शराब पीने दे ! खुलेगा अब्र तो हम भी नमाज़ पढ़ लेंगे , अभी तो काली घटा है शराब पीने दे ! ---- ग़मो की भीड़ खड़ी है चलो शराब पीये , ये इम्तिहाँ की घड़ी है चलो शराब पीएं ! ग़मो की भीड़ खड़ी है चलो शराब पियें ----- ये थोड़ी देर के मिलने बिछड़ने का ग़म क्यूँ - 3 तमाम उम्र पड़ी है चलो शराब पियें ! ये इम्तिहाँ की घड़ी है चलो शराब पीएं ! ग़मो की भीड़ खड़ी है चलो शराब पियें ----- उदासियों में इन्हें चाँद तारे मत समझो- 3 ये आंसुओं की -२ लड़ी है चलो शराब पियें , ये इम्तिहाँ की घड़ी है चलो शराब पीएं ! ग़मो की भीड़ खड़ी है चलो शराब पियें ----- किसी के नाम से आओ संवार ले दुनियां - 3 किसी से-२ आँख लड़ी है चलो शराब पियें ये इम्तिहाँ की घड़ी है चलो शराब पीएं ! ग़मो की भीड़ खड़ी है चलो शराब पियें ----- वो ख़ुद ही आएंगे या हम बुला के लाएंगे , यहीं पे - २ बात अड़ी है चलो शराब पीएं ये इम्तिहाँ की घड़ी है चलो शराब पीएं ! ग़मो की भीड़ खड़ी है चलो शराब पियें ----- अभी जवान हो तुम क्या...
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