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SHAYARI 01.05.2022

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 मुझे घमंड नहीं है किसी भी बात का क्योंकि मैं जानता हूं कि, एक रात जिंदगी में ऐसी भी होगी, जिसके बाद कोई सवेरा नही होगा ! भीड़ में खड़ा होना मकसद नहीं है मेरा बल्कि भीड़ जिसके लिए खड़ी है वह बनना है मुझे लोग कहते हैं ज़मीं पर किसी को ईश्वर नहीं मिलता, शायद उन लोगों को दोस्त कोई तुम-सा नहीं मिलता ! निगाहों से भी चोट लगती है  जब  कोई देख कर अनदेखा  कर दे लफ्जों का इस्तेमाल हिफाजत से करिए ये परवरिश का बेहतरीन सबूत है  

Shayri

शतरंज का शौकीन नहीं था इसलिए धोखा खा गया  ! वो मोहरे चल रहे थे मैं दोस्ती समझ रहा था !!

Shayri

सुनहरी भोर लिक्खा है सुहानी शाम लिक्खा है। कभी तितली के पंखों पर तुम्हे पैगाम लिखा है।। मेरी साँसों में अक्सर ही जो आ कर के महकती है। हवाओं के बदन पर भी तुम्हारा नाम लिक्खा ...