शायद शायरी इसलिए भी इतनी खूबसूरत होती है , कभी ' सच ' छुपा लेती है , कभी ' शख्स ' को छुपा लेती है - - - - सलीका अदब का तो बरकरार रखिये , ज़नाब ! रंज़िशें अपनी जगह है , ' सलाम ' अपनी जगह !! - - - - मिल जाएंगे हमारी भी तारीफ करने वाले , कोई हमारी मौत की अफवाह तो फैला दो। - - - - फ़रिश्ते ही होंगे जिनका हुआ इश्क़ मुक़म्मल ! इंसानो को तो हमने सिर्फ़ बर्बाद होते देखा है !! - - - - तेरी मोहब्बत को कभी खेल नहीं समझा ! वरना खेल तो इतने खेले हैं कि कभी हारे नहीं !! - - - - मत पूछो शीशे से उसकी टूटने की वजह , उसने भी किसी पत्थर को अपना समझा होगा - -- - अपने मेहमान को पलकों पर बिठा लेती है गरीबी जानती है कि घर में बिछौने कम है - - - - मौसम-ए-इश्क़ है ये ज़रा ख़ुश्क हो जायेगा ! ना उलझा करो हमसे वरना इश्क़ हो जाएगा !! - - - - अजीब लोग थे , कब्रों पे जान देते थे। सड़क की लाश का , कोई भी दावेदार ना था। - - - - ज़िन्दगी ले आई है ऐसे मोड़ पर , जा भी नही सकते अगले मोड़ तक।। - - - - ...