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Showing posts with the label GHAZLEN

Chale Tow Kat Hi Jayega Safar_चले तो कट ही जाएगा सफ़र_Cover_Sweta Srivast...

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चले तो कट ही जाएगा सफ़र, आहिस्ता आहिस्ता, हम उनके पास जाते थे मगर आहिस्ता आहिस्ता Cover: Sweta Srivastava   https://youtu.be/_VcnPyzV5f8

बड़ी हसीन रात थी_Pradeep Srivstava_#shortvideo

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मुझे पिला रहे थे वो कि खुद ही शम्मा बुझ गई, गिलास गुम शराब गुम बड़ी हसीन रात थी   

Gulon Mein Rang Bhare Baadey Naubahar Chale_Faiz_गुलों मे रंग भरे_Singer...

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#GHAZAL गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौबहार चले | चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले || मुकाम ' फैज़ ' राह में कोई जंचा ही नहीं | जो कू-ए-यार से निकले तो सू-ए-दार चले | फैज़ अहमद फैज़ गायक- प्रदीप श्रीवास्तव https://youtu.be/_IIeMxcAi-0

SHAYARI 29-05-2025

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तेरे ख्यालो को यूं ही  लफ्ज देने लगे है, और लोग कहते है, हम शायरी करने लगे है !  

Darichon Ko To Dekho_दरीचों को तो देखो चिलमनों के राज़ तो समझो _Short_Cov...

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दरीचों को तो देखो चिलमनों के राज़ तो समझो, उठेंगे परदा हे बयां-ओ-दर आहिस्ता आहिस्ता !   https://youtube.com/shorts/-0noHom6p3s

Ye Bheega Hua Mausam Ek Saaf Ishara Hai_ये भीगा हुआ मौसम एक साफ़ इशारा है...

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ग़ज़ल: ये भीगा हुआ मौसम एक साफ़ इशारा है, मैख़ाने चलो रिन्दों साक़ी ने पुकारा है ! गायक: प्रदीप श्रीवास्तव शायर: वेद प्रकाश शुक्ल ‘संजर’   https://youtu.be/Gl6X1ZYB-lM

Kal Chaudhvin Ki Raat Thi_Lyric_Ibne Insha_कल चौदहवीं की रात थी_Singer_ ...

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कल चौदहवीं की रात थी , शब भर रहा चर्चा तेरा कुछ ने कहा ये चाँद है , कुछ ने कहा चेहरा तेरा स्वर: प्रदीप श्रीवास्तव https://youtu.be/LwtZKr 8 HTd 8

Ab Ke Saal Sawan Me( अब के साल सावन मे )- Wajahat Hussain

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Ye Jo Halka Halka Suroor With New Sher_ये जो हल्का हल्का सुरूर है नए शेर...

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ग़ज़ब की महफ़िल, ग़ज़ब की शायरी :   ये जो हल्का हल्का सुरूर है, ये तेरी नज़र का कुसूर है, मुझे शराब पीना सिखा दिया Singer: Pradeep Srivastava   https://youtu.be/bZlqMZwMH7s

Chandi Jaisa Rang Hai Tera_चांदी जैसा रंग है तेरा सोने जैसे बाल_Live_Cov...

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क़तील शिफ़ाई चांदी जैसा रंग है तेरा सोने जैसे बाल, एक तूही धनवान है गोरी बाकी सब कंगाल ! Live By – Pradeep Srivastava https://youtu.be/cK_TvzFwPTs

MEER TAQI MEER - KYA KAHUN TUMSE MAIN KI KYA HAI ISHQ

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MEER – KYA KAHUN TUMSE MAIN KYUN   क्या कहूँ तुमसे मैं कि क्या है इश्क़, जान का रोग है बला है इश्क़ ! इश्क़ ही इश्क़ है जहां देखो, सारे आलम में भर रहा है इश्क़ ! इश्क़ है तर्ज़ो-तौर इश्क़ के तई, कहीं बन्दा कहीं ख़ुदा है इश्क़ ! इश्क़ माशूक़ इश्क़ आशिक़ है, यानी अपना ही मुबित्ला है इश्क़ ! दिलकश ऐसा कहाँ है दुश्मने जां, मुद्दई है प मुद्दुआ है इश्क़ ! कौन मक़सद को इश्क़ बिन पहुंचा, आरज़ू इश्क़ मुद्दुआ है इश्क़ !   - मीर तक़ी मीर     

Kisko Qatil Main Kahun_ Jagjit Singh Live At Dubai

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किस को क़ातिल मैं कहूँ किस को मसीहा समझूँ सब यहाँ   दोस्त ही बैठे हैं किसे क्या समझूँ वो भी क्या दिन थे के   हर वहम यक़ीं   होता था अब हक़ीक़त नज़र आए तो उसे क्या समझूँ दिल जो टूटा तो कई हाथ दुआ को उट्ठे ऐसे माहौल में अब किस को पराया समझूँ ज़ुल्म ये है के   है यकता   तेरी बेगानारवी लुत्फ़ ये है   के   मैं अब तक तुझे अपना समझूँ ( यकता = अनुपम , अद्धितीय , बेजोड़) , ( बेगानारवी = परायापन) - अहमद नदीम क़ासमी https://youtu.be/eLeMLEef6Vc

Yun Dawat-E-Sharab Na Do Main Nashe Mein Hun- Cover by Pradeep Srivastav...

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"Thukrao Ab Ke Pyar Karo Main Nashe Mein Hun"   This is Live performance in the Marriage function of Harsh Pandey S/o Sri Vijay Kumar, Ex. Addl.Director (System) with my own style. Please don't compare with original Song of Jagjit Singh ji.   यूं दावते शराब न दो मैं नशे में हूँ, ये दूसरी शराब न दो, मैं नशे में हूँ ! - कृष्ण बिहारी नूर ठुकराओ अब के प्यार करो मैं नशे में हूँ ! - शाहिद कबीर  

Aye Ghame Zindgi_ Live & Cover By Pradeep Srivastava Singer

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AYE GHAME ZINDGI KUCHT TO DE MASHWARA ALBUM - NAAYAB 1985 SINGER : PANKAJ UDHAS LYRIC : ZAFAR GORAKHPURI UNIVERSAL MUSIC INDIA PVT.LTD.                  COVER & LIVE BY PRADEEP SRIVASTAVA https://youtu.be/ylTwVgXV1E4 UPLOAD ON 12.11.2020

Chandan Das Live On 11.10.1991 At Kanpur_ Ahikri Khat Hai Mera

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आख़िरी ख़त है मेरा जिसपे है नाम तेरा , आज के बाद कोई ख़त ना लिखुंगा तुझको Live recording of Chandan Das at Kanpur https://youtu.be/WTRSfReKx7o

DUNIYA JISE KAHTE HAIN - NIDA FAZILI

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  DUNIYA JISE KAHTE HAIN - NIDA FAZILI   दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है मिल जाए तो मिट्टी है खो जाए तो सोना है। अच्छा सा कोई मौसम तनहा सा कोई आलम , हर वक़्त का रोना तो बेकार का रोना है। बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने , किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है। ग़म हो कि   ख़ुशी दोनों कुछ देर के साथी हैं , फिर रस्ता ही रस्ता है हंसना है न रोना है। - निदा फ़ाज़िली

DIN KO BHI ITNA ANDHERA HAI MERE KAMRE ME - ZAFAR GORAKHPURI

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  DIN KO BHI ITNA ANDHERA HAI MERE KAMRE ME - ZAFAR GORAKHPURI   दिन को भी इतना अँधेरा है मेरे कमरे में , साया आते हुए डरता है मेरे कमरे में । ग़म थका हारा मुसाफ़िर   है चला जाएगा , कुछ दिनों के लिए ठहरा है मेरे कमरे में । सुबह तक देखना अफ़साना बना डालेगा , तुझको इक शख़्स   ने देखा है मेरे कमरे में । दर बदर दिन को भटकता है तसव्वुर मेरा , हाँ मगर रात को रहता है मेरे कमरे में । चोर बैठा है कहाँ , सोच रहा हूँ मैं ज़फ़र , क्या कोई और भी कमरा है मेरे कमरे में । -   ज़फ़र गोरखपुरी

ज़िंदगी जब भी तेरी बज़्म में लाती है हमें ~ शहरयार

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  ज़िंदगी जब भी तेरी बज़्म में लाती है हमें , ये ज़मीं चाँद से बेहतर नज़र आती है हमें ! सुर्ख़   फूलों से महक उठती है दिल की राहें , दिन ढले यूँ तेरी आवाज़ बुलाती है हमें ! याद तेरी कभी दस्तक कभी सरगोशी से , रात के पिछले पहर रोज़ जगाती है हमें ! हर मुलाक़ात का अंजाम जुदाई क्यों है , अब तो हर वक़्त यही बात सताती है हमें ! ~ शहरयार

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले - 'ग़ालिब'

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  हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले   डरे क्यूँ मेरा क़ातिल क्या रहेगा उस की गर्दन पर वो ख़ूँ जो चश्म-ए-तर से उम्र भर यूँ दम-ब-दम निकले   निकलना ख़ुल्द से आदम का सुनते आए हैं लेकिन बहुत बे-आबरू हो कर तिरे कूचे से हम निकले   भरम खुल जाए ज़ालिम तेरे क़ामत की दराज़ी का अगर इस तुर्रा-ए-पुर-पेच-ओ-ख़म का पेच-ओ-ख़म निकले   मगर लिखवाए कोई उस को ख़त तो हम से लिखवाए हुई सुब्ह और घर से कान पर रख कर क़लम निकले   हुई इस दौर में मंसूब मुझ से बादा-आशामी फिर आया वो ज़माना जो जहाँ में जाम-ए-जम निकले   हुई जिन से तवक़्क़ो ' ख़स्तगी की दाद पाने की वो हम से भी ज़ियादा ख़स्ता-ए-तेग़-ए-सितम निकले   मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले   कहाँ मय-ख़ाने का दरवाज़ा ' ग़ालिब ' और कहाँ वाइ ' ज़ पर इतना जानते हैं कल वो जाता था कि हम निकले

https://youtu.be/eh7r1ltqBxg मुस्करा कर वो जब आएंगे

  MUSKRA KAR WO JAB AAYENGE मुस्करा कर वो जब आएंगे LYRIC - HASAN QAZMI SINGER - PRADEEP SRIVASTAVA https://youtu.be/eh7r1ltqBxg