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Showing posts from July, 2026

हुज़ूर साहेब"की एक दुर्लभ तस्वीर

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दास चरनन का अपने बना लेना ! हमपे नज़रे करम हो दया करना !! गुरुपूर्णिमा के अवसर पर मेरे गुरु जी "हुज़ूर साहेब"की एक दुर्लभ तस्वीर जो मुझे मेरे मित्र श्री राजा वर्मा से प्राप्त हुई :   

SHAYARI OF THE DAY

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सोज़ रखता हूँ मगर साज़ कहाँ से लाऊँ, हाले दिल कहने का अंदाज़ कहाँ से लाऊँ ! अपने जज़्बात में दुनियां को डुबो दूँ लेकिन, तुझसे मिलती हुई आवाज़ कहाँ से लाऊँ !  

पत्नी द्वारा खतरनाक हत्या की शादी

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पति की हत्या के लिए दो दिन भूखा रखा गया साँप! खौफनाक साजिश का खुलासा

पत्नी द्वारा खतरनाक हत्या की शादी

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पति की हत्या के लिए दो दिन भूखा रखा गया साँप! खौफनाक साजिश का खुलासा

SHAYARI

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हज़ार जान तसद्दुक़ हज़ार मयख़ाने, निगाह-ए-यार की लज़्ज़त शराब क्या जाने !  

SHAYARI

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सुप्रभात, ईश्वर वही है ख़ुदा भी वही ! जाने क्यूँ उसके बन्दे अलग हो गए !  

shayari

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हम अँधेरी गुफाओं से निकले मगर, हमसे जंगल की तहज़ीब छूटी नहीं ! हमने जंगल को शहरों में बदला मगर, रौशनी अपने सीने में फूटी नहीं !  

HUZUR SAHEB KI SHAYARI

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ये रंगे जुनू जब से इस दरद को भाया है, कुछ याद नहीं रहता क्या खोया क्या पाया है ! हर वक़्त निगाहों में वो जलवा समाया है, हमने तो ख़ुदा अपना इस दिल में बसाया है ! -हज़रत मंज़ूर आलम शाह  

MUSICAL PHERE

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💐 विवाह के पावन अवसर पर सप्तपदी (फेरों) के लिए मधुर संगीतमय प्रस्तुति 💐 विवाह के पवित्र फेरों के प्रत्येक मंगल क्षण को पारंपरिक, भावपूर्ण और मधुर गीतों से यादगार बनाइए। मधुर स्वर लहरियों के साथ प्रस्तुत हैं— 🎵 प्रदीप श्रीवास्तव म्यूजिकल ग्रुप 🎵 फेरों के पारंपरिक मंगल गीत, विवाह गीत, भजन एवं सुरीली संगीतमय प्रस्तुतियों के लिए आज ही संपर्क करें। 📞 मोबाइल: +91 9140886598 "संगीत ऐसा, जो विवाह की हर रस्म को बना दे अविस्मरणीय।"  

PINAZ MASANI , GHAZAL SINGER

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इन्हे तो आप जानते ही होंगे अगर नहीं तो मैं आपको बता रहा हूँ  ये हैं विश्वप्रसिद्ध ग़ज़ल गायिका पीनाज़ मसानी, कानपुर विकास प्राधिकरण के कार्यक्रम में इनके साथ गाने का मौका  मिला था | वो याद अभी तक संजो कर रख्खी है | तलत अज़ीज़ के साथ गाया हुआ डुएट "ये बहार कह रही है " यूट्यूब पर सुनिए तब समझ में आएगा   

हुज़ूर साहब की शायरी

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गुरूदेव के चरणों मे नमन : काबा मे भी जलवा है काशी मे नजारा है, हम जिसके पुजारी हैं वो सब का सहारा है ! आँखों मे लगाया है उस कूचए जाना को, उस खाक का हर ज़र्रा इस जान से प्यारा है ! -हज़रत मंज़ूर आलम शाह   

ANURADHA PODWAL JI

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होटल लैंडमार्क का कमरा और अनुराधा पोडवाल जी के साथ एक औपचारिक भेंट हुई थी जो आज भी हृदय पर अंकित है |   

HUZUR SAHEB KI SHAYARI

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दर्द में डूबे हुए मिलते हैं लम्हात कहाँ, जिसकी लज़्ज़त से खुले रूह वो सौग़ात कहाँ, उनसे मिल आऊं तो लेकिन हो मुलाक़ात कहाँ, अपनी जानिब जो नज़र डालूं तो औक़ात कहाँ, हम तो हर तरह से अपने को गुनहगार मिले, फिर भी सोचा है  कि कुछ भी हो मगर दिलदार मिले ! -हज़रत मंज़ूर आलम शाह   

SUFI SHAYARI

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ऐसा जो कोई यार कहीं हो तो बताऊँ, बाज़ार में मिलता हो तो बाज़ार से लाऊँ, उस शक्ल की तस्वीर बनी हो तो दिखाऊं, तुमको जो तमन्ना है कि मैं भी उसे पाऊं, इस दिल में उतर कर उसे ढूंढ़ो तो मिलेगा, ऐसे नहीं मिलता उसे पूजो तो मिलेगा ! - हज़रत मंज़ूर आलम शाह   

SHAYARI

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किस तरह मैं देखूं भी बातें भी करूँ तुझसे, आँख अपना मज़ा चाहे, दिल अपना मज़ा चाहे  -कृष्ण बिहारी नूर  

HUZUR SAHEB KI SHAYARI

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एक नूर वाले का हर तरफ़ उजाला है ! क़ायनात में हर सू उसका बोलबाला है !! उसके दम से रौशन है मैकदे तजल्ली के ! मयकदों में जानो दिल उस करम ने पाला है !! ~ शाह मंज़ूर आलम " शाह "