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LYRIC_AAPKE DIL ME KYA HAI BATA DIJIYE_SHAYAR-ISRAR ANSARI

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AAPKE DIL ME KYA HAI BATA DIJIYE_CHANDAN DAS   आँख तो प्यार मे दिल की ज़बाँ होती है, सच्ची चाहत तो सदा बेज़ुबान होती है ! प्यार मे दर्द भी मिले तो कैसा घबराना, सुन है दर्द चाहत जवान होती है ! ग़ज़ल आपके दिल मे क्या है बता दीजिए – 2 यूं ना खामोश रह कर सज़ा दीजिए ! ---- या तो वादा वफ़ा आप पूरा करें, या उम्मीदों की शअम्मा बुझा दीजिए ! ---- आप को चाह कर कुछ ना चाहा कभी – 2 मेरी चाहत का कुछ तो सिला दीजिए ! ---- फूल मुरझा गए आप की चाह मे, मुस्करा कर उन्हें फिर खिला दीजिए ! ---- शायर: इसरार अंसारी गायक: चंदन दास  

CHANDAN RAI KI SHAYARI

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बोझ दिल को बहुत न ढोने दे, जो भी आराम से हो होने दे ! ऐसे सपनो की क्या ज़रूरत है, जो हमें चैन से सोने न दे ! - चन्दन राय  मेरी इज़्ज़त उछल सकती थी, यूँ भी अरमान पाल सकती थी, उसने अच्छा किया कि छोड़ दिया है, वरना ड्रम में भी डाल सकती थी ! - चन्दन राय  ---- वो तेरे साथ चल भी सकता है, तुमसे आगे निकल भी सकता है ! प्यार करना यक़ीन मत करना, आदमी है बदल भी सकता है ! -चन्दन राय  ---- हम मुसीबत से गिर नहीं सकते, अपने वादों से फिर नहीं सकते ! ऐ मोहब्बत तुम्हारे क़दमों में, झुक तो सकते हैं गिर नहीं सकते ! - चन्दन राय   

LYRIC_APNE HOTON PAR SAJANA CHAHTA HUN_QATEEL SHIFAI

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APNE HOTON PE SAJANA CHAHTA HUN अपने   होटों   पर   सजाना   चाहता   हूँ   -   २ आ   तुझे   मैं   गुनगुनाना   चाहता   हूँ   अपने   होटों   पर   सजाना   चाहता   हूँ ......... कोई   आंसू   तेरे   दामन   पर   गिरा   कर   -   २ बूँद   को   मोती   बनाना   चाहता   हूँ   -   २ अपने   होटों   पर   सजाना   चाहता   हूँ ......... थक   गया   मैं   करते   करते   याद   तुझको   - २   अब   तुझे   मैं   याद   आना   चाहता   हूँ   -   २   अपने   होटों   पर   सजाना   चाहता   हूँ ......... छा   रहा   है   सारी   बस्ती   में   अँधेरा   - २   रौशनी   को   घर   जलना   चाहता   हूँ   -   २   अपने   होटों   पर ...

LYRIC_AGAR HAM KAHEN AUR WO MUSKURA DE_SUDARSHAN FAQIR

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AGAR HAM KAHEN AUR WO MUSKURA DE_JAGJEET_SUDARSHAN FAQIR   M अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें -2 M हम उन के लिए ज़िंदगानी लुटा दें F हर इक मोड़ पर हम ग़मों को सज़ा दें - 2 F चलो ज़िंदगी को मोहब्बत बना दें F हर इक मोड़ पर हम ग़मों को सज़ा दें ---- M अगर ख़ुद को भूले तो कुछ भी न भूले - 2 M कि चाहत में उन की ख़ुदा को भुला दें M अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें ---- F कभी ग़म की आँधी जिन्हें छू न पाए - 2 F वफ़ाओं के हम वो नशेमन बना दें F अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें ---- M क़यामत के दीवाने कहते हैं हम से - 2 M चलो उन के चेहरे से पर्दा हटा दें M अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें ---- F सज़ा दें सिला दें बना दें मिटा दें -2 F मगर वो कोई फ़ैसला तो सुना दें F हर इक मोड़ पर हम ग़मों को सज़ा दें F चलो ज़िंदगी को मोहब्बत बना दें M अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें M हम उन के लिए ज़िंदगानी लुटा दें F चलो ज़िंदगी को मो...

LYRIC_KHUDA KARE KI MOHABBAT MEIN YE MAQAAM AAYE_SHAYAR-TASLEEM FAZLI

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KHUDA KARE KI MOHABBAT ME_TASLEEM FAZLI ख़ुदा करे कि मोहब्बत में ये मक़ाम आए - २ किसी का नाम लूँ लब पे तुम्हारा नाम आए ख़ुदा करे कि मोहब्बत में ये मक़ाम आए ख़ुदा करे ss ---- कुछ इस तरह से जिए ज़िंदगी बसर न हुई - २ तुम्हारे बा ' द किसी रात की सहर न हुई सहर नज़र से मिले ज़ुल्फ़ ले के शाम आए किसी का नाम लूँ लब पे तुम्हारा नाम आए ख़ुदा करे कि मोहब्बत में ये मक़ाम आए ख़ुदा करे ss ---- ख़ुद अपने घर में वो मेहमान बन के आए हैं सितम तो ये है कि अंजाम बन के आए हैं हमारे दिल की तड़प आज कुछ तो काम आए किसी का नाम लूँ लब पे तुम्हारा नाम आए ख़ुदा करे कि मोहब्बत में ये मक़ाम आए ख़ुदा करे ss ---- वही है साज़ वही गीत है वही मंज़र हर एक चीज़ वही है नहीं हो तुम वो मगर उसी तरह से निगाहें उठें सलाम आए किसी का नाम लूँ लब पे तुम्हारा नाम आए ख़ुदा करे कि मोहब्बत में ये मक़ाम आए ख़ुदा करे ss ---- शायर: तस्लीम फ़ाज़ली / स्वर: मेहंदी हसन  

LYRIC_AAPKE DIL ME KYA HAI BATA DIJIYE_आपके दिल मे क्या है बता दीजिए_SHAYAR ISRAR ANSARI

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  ग़ज़ल आप के दिल मे क्या है बता दीजिए-3 यूं न खामोश रह कर सज़ा दीजिए ! आप के दिल मे क्या है बता दीजिए ---- या तो वादा वफ़ा आप पूरा करें, या उम्मीदों की शम्मा बुझा दीजिए यूं न खामोश रह कर सज़ा दीजिए ! आप के दिल मे क्या है बता दीजिए – 2 ----   आप को चाह कर कुछ ना चाहा कभी – 2 मेरी चाहत का कुछ तो सिला दीजिए – 2 यूं न खामोश रह कर सज़ा दीजिए ! आप के दिल मे क्या है बता दीजिए – 2 ---- फूल मुरझा गए आप की चाह मे,-2 मुस्कुरा कर उन्हें फिर खिला दीजिए -2 यूं न खामोश रह कर सज़ा दीजिए ! आप के दिल मे क्या है बता दीजिए- 2 ---- शायर : इसरार अंसारी

LYRIC_DUSHYANT KUMAR_HO GAYI HAI PEER_ हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए

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HO GAI PEER PARWAT SI_DUSHYANT KUMAR   हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए , इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए। आज यह दीवार , परदों की तरह हिलने लगी , शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए। हर सड़क पर , हर गली में , हर नगर , हर गाँव में , हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए। सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं , सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए। मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही , हो कहीं भी आग , लेकिन आग जलनी चाहिए। - दुष्यन्त कुमार