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shayari

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हम अँधेरी गुफाओं से निकले मगर, हमसे जंगल की तहज़ीब छूटी नहीं ! हमने जंगल को शहरों में बदला मगर, रौशनी अपने सीने में फूटी नहीं !  

HUZUR SAHEB KI SHAYARI

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ये रंगे जुनू जब से इस दरद को भाया है, कुछ याद नहीं रहता क्या खोया क्या पाया है ! हर वक़्त निगाहों में वो जलवा समाया है, हमने तो ख़ुदा अपना इस दिल में बसाया है ! -हज़रत मंज़ूर आलम शाह  

MUSICAL PHERE

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💐 विवाह के पावन अवसर पर सप्तपदी (फेरों) के लिए मधुर संगीतमय प्रस्तुति 💐 विवाह के पवित्र फेरों के प्रत्येक मंगल क्षण को पारंपरिक, भावपूर्ण और मधुर गीतों से यादगार बनाइए। मधुर स्वर लहरियों के साथ प्रस्तुत हैं— 🎵 प्रदीप श्रीवास्तव म्यूजिकल ग्रुप 🎵 फेरों के पारंपरिक मंगल गीत, विवाह गीत, भजन एवं सुरीली संगीतमय प्रस्तुतियों के लिए आज ही संपर्क करें। 📞 मोबाइल: +91 9140886598 "संगीत ऐसा, जो विवाह की हर रस्म को बना दे अविस्मरणीय।"  

PINAZ MASANI , GHAZAL SINGER

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इन्हे तो आप जानते ही होंगे अगर नहीं तो मैं आपको बता रहा हूँ  ये हैं विश्वप्रसिद्ध ग़ज़ल गायिका पीनाज़ मसानी, कानपुर विकास प्राधिकरण के कार्यक्रम में इनके साथ गाने का मौका  मिला था | वो याद अभी तक संजो कर रख्खी है | तलत अज़ीज़ के साथ गाया हुआ डुएट "ये बहार कह रही है " यूट्यूब पर सुनिए तब समझ में आएगा   

हुज़ूर साहब की शायरी

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गुरूदेव के चरणों मे नमन : काबा मे भी जलवा है काशी मे नजारा है, हम जिसके पुजारी हैं वो सब का सहारा है ! आँखों मे लगाया है उस कूचए जाना को, उस खाक का हर ज़र्रा इस जान से प्यारा है ! -हज़रत मंज़ूर आलम शाह   

ANURADHA PODWAL JI

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होटल लैंडमार्क का कमरा और अनुराधा पोडवाल जी के साथ एक औपचारिक भेंट हुई थी जो आज भी हृदय पर अंकित है |   

HUZUR SAHEB KI SHAYARI

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दर्द में डूबे हुए मिलते हैं लम्हात कहाँ, जिसकी लज़्ज़त से खुले रूह वो सौग़ात कहाँ, उनसे मिल आऊं तो लेकिन हो मुलाक़ात कहाँ, अपनी जानिब जो नज़र डालूं तो औक़ात कहाँ, हम तो हर तरह से अपने को गुनहगार मिले, फिर भी सोचा है  कि कुछ भी हो मगर दिलदार मिले ! -हज़रत मंज़ूर आलम शाह