दास चरनन का अपने बना लेना ! हमपे नज़रे करम हो दया करना !! गुरुपूर्णिमा के अवसर पर मेरे गुरु जी "हुज़ूर साहेब"की एक दुर्लभ तस्वीर जो मुझे मेरे मित्र श्री राजा वर्मा से प्राप्त हुई :
सोज़ रखता हूँ मगर साज़ कहाँ से लाऊँ, हाले दिल कहने का अंदाज़ कहाँ से लाऊँ ! अपने जज़्बात में दुनियां को डुबो दूँ लेकिन, तुझसे मिलती हुई आवाज़ कहाँ से लाऊँ !