MOHABBAT KARNE WALE KAM NA HONGE_LYRIC_HAFEEZ HOSHIYARPURI
मोहब्बत करने वाले कम न होंगे तिरी महफ़िल में लेकिन हम न होंगे मोहब्बत करने वाले कम न होंगे ----- ज़माने भर के ग़म या इक तिरा ग़म ये ग़म होगा तो कितने ग़म न होंगे तिरी महफ़िल में लेकिन हम न होंगे मोहब्बत करने वाले कम न होंगेss ----- अगर तू इत्तिफ़ाक़न मिल भी जाए तिरी फ़ुर्क़त के सदमे कम न होंगे तिरी महफ़िल में लेकिन हम न होंगे मोहब्बत करने वाले कम न होंगेss ----- दिलों की उलझनें बढ़ती रहेंगी अगर कुछ मशवरे बाहम न होंगे तिरी महफ़िल में लेकिन हम न होंगे मोहब्बत करने वाले कम न होंगेss ----- 'हफ़ीज़' उन से मैं जितना बद-गुमाँ हूँ वो मुझ से उस क़दर बरहम न होंगे तिरी महफ़िल में लेकिन हम न होंगे मोहब्बत करने वाले कम न होंगेss ----- - हफ़ीज़ होशियारपुरी फुरकत - दूरी, विरह बाह्यम - मिलजुलकर, आपस मे बदगुमा- खराब, निकम्मा बरहम - तितर बितर, इधर उधर