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SUFI SHAYARI

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ऐसा जो कोई यार कहीं हो तो बताऊँ, बाज़ार में मिलता हो तो बाज़ार से लाऊँ, उस शक्ल की तस्वीर बनी हो तो दिखाऊं, तुमको जो तमन्ना है कि मैं भी उसे पाऊं, इस दिल में उतर कर उसे ढूंढ़ो तो मिलेगा, ऐसे नहीं मिलता उसे पूजो तो मिलेगा ! - हज़रत मंज़ूर आलम शाह   

SHAYARI

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किस तरह मैं देखूं भी बातें भी करूँ तुझसे, आँख अपना मज़ा चाहे, दिल अपना मज़ा चाहे  -कृष्ण बिहारी नूर  

HUZUR SAHEB KI SHAYARI

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एक नूर वाले का हर तरफ़ उजाला है ! क़ायनात में हर सू उसका बोलबाला है !! उसके दम से रौशन है मैकदे तजल्ली के ! मयकदों में जानो दिल उस करम ने पाला है !! ~ शाह मंज़ूर आलम " शाह "  

SHAYARI

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जिस्म फ़ानी है सजाने की ज़रूरत क्या है, हुस्न दुनिया को दिखाने की ज़रूरत क्या है ! ऐसे अमाल करो रूह से ख़ुश्बू आये, इत्र कपड़ों में लगाने की ज़रूरत क्या है !  

ISHQ JAB EK TARAF HO TO SAZA DETA HAI_LYRIC_HASRAT JAIPURI

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ISHQ JAB EK TARAF HO TO_HASRAT JAIPURI Lyricist: Hasrat Jaipuri Singer: Hussain Brothers इश्क गर एक तरफ़ हो तो सज़ा देता है-2 और जब दोनों तरफ़ हो तो मज़ा देता है ! इश्क गर एक तरफ़ हो तो सज़ा देता है ---- अपने माथे पे ये बिंदिया की चमक रहने दो- 2 ये सितारा मुझे मंज़िल के पता देता है- 2 और जब दोनों तरफ़ हो तो मज़ा देता है ! इश्क गर एक तरफ़ हो तो सज़ा देता है ---- ऐ नमकपाश तेरी साँवली सूरत की क़सम- 2 दिल का हर ज़ख़्म तुझे दिल से दुआ देता है – 2 और जब दोनों तरफ़ हो तो मज़ा देता है ! इश्क गर एक तरफ़ हो तो सज़ा देता है ---- तू मुझे प्यार से देखे या न देखे ज़ालिम- 2 तेरा अंदाज़ मोहब्बत का पता देता है – 2 और जब दोनों तरफ़ हो तो मज़ा देता है ! इश्क गर एक तरफ़ हो तो सज़ा देता है ----     आग में आग लगाता है सुलगते दिल को- 2 जब वो मिलता है तो दामन से हवा देता है – 2 और जब दोनों तरफ़ हो तो मज़ा देता है ! इश्क गर एक तरफ़ हो तो सज़ा देता है ----   मैं किसी ज़ाम का मोहताज नहीं हूँ ‘हसरत’- 2 मेरा साकी मुझे आँखों से पिला देता है ...

NAZAR MUJHSE MILATI HO_LYRIC_HASRAT JAIPURI

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NAZAR MUJHSE MILATI HO_AHMAD HUSHAIN MOHD. HUSAIN   नज़र मुझसे मिलाती हो तो तुम शरमा-सी जाती हो , इसी को प्यार कहते हैं , इसी को प्यार कहते हैं   } 2   ----- जबाँ ख़ामोश है लेकिन निग़ाहें बात करती हैं – 2 अदाएँ लाख भी रोको , अदाएँ बात करती हैं नज़र नीची , किए दाँतों , में उँगली को दबाती हो इसी को प्यार कहते हैं , इसी को प्यार कहते हैं ----- छुपाने से मेरी जानम , कहीं क्या प्यार छुपता है – 2 ये ऐसा मुश्क है ख़ुशबू , हमेशा देता रहता है तुम तो सब जानती हो, फिर भी तुम मुझको सताती हो इसी को प्यार कहते हैं , इसी को प्यार कहते हैं ! ---- तुम्हारे प्यार का ऐसे हमें इज़हार मिलता है – 2 हमारा नाम सुनते ही, तुम्हारा रंग खिलता है और फिर साज़-ए-दिल पर तुम, हमारे गीत गाती हो इसी को प्यार कहते हैं , इसी को प्यार कहते हैं ---- तुम्हारे घर में जब आऊँ, तो छुप जाती हो परदे में – 2 मुझे जब देख ना पाओ तो घबराती हो परदे में ख़ुद ही चिलमन, उठा कर फिर, इशारों से बुलाती हो इसी को प्यार कहते हैं , इसी को प्यार कहते हैं। नज़र मुझसे मिलाती हो तो तुम श...

JAB CHAHA JAZBAAT SE KHELA_LYRIC_NASEEM NIFAT

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  AB CHAHA JAZBAAT SE KHELA_CHANDAN DAS   जब चाहा जज़्बात से खेले , जब चाहा दिल तोड़ दिया , हमने भी ऐसे लोगों से -२ मिलना जुलना छोड़ दिया जब चाहा जज़्बात से खेले , जब चाहा दिल तोड़ दिया , ---- तुमको कुछ एहसास नहीं है , हैरत तो इस बात की है }- २ तुमने तो बातों बातों में-२ दिल का छाला फोड़ दिया , हमने भी ऐसे लोगों से मिलना जुलना छोड़ दिया जब चाहा जज़्बात से खेले , जब चाहा दिल तोड़ दिया , ---- रह रह कर ये सोच रहा हूँ , कौन है ऐसा जादूगर !- २ जिसकी एक आवाज़ ने बढ़ के ,- २ तूफां का रुख़ मोड़ दिया हमने भी ऐसे लोगों से मिलना जुलना छोड़ दिया जब चाहा जज़्बात से खेले , जब चाहा दिल तोड़ दिया , ---- क्या करना था , क्या कर बैठे सोचा समझा कुछ भी नहीं , तुम भी तन्हा हो मुझको भी , तुमने तन्हा छोड़ दिया हमने भी ऐसे लोगों से -२ मिलना जुलना छोड़ दिया जब चाहा जज़्बात से खेले , जब चाहा दिल तोड़ दिया , ---- शायर: नसीम रिफ़अत गायक - चन्दन दास