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JAB BHI MAIKHANE SE PEE KAR HAM CHAL_SHAYAR- KAAMIL CHANDPURI

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JAB BHI MAIKHANE SE PEE KAR_MEHANDI HASSAN   जब भी मैखाने से पी कर हम चले साथ ले कर सेंकड़ों आलम चले }}-2 साथ ले कर सेंकड़ों आलम चले ss ----- थक गये थे ज़िंदगी की राह मैं – 2+2   हो के मैखाने से ताज़ा दम चले- 2 साथ ले कर सेंकड़ों आलम चले ss ----- बाद मुद्दत के मिले हैं आज वो 2+2 गर्दिश-ए-दौरान ज़रा मद्धम चले – 2 साथ ले कर सेंकड़ों आलम चले ss ----- जितने ग़म ज़ालिम ज़माने ने दिए – 2+2 दफ़न कर के मैकदे मे हम चले – 2 साथ ले कर सेंकड़ों आलम चले ss ----- पीने वालो मौसमों की क़ैद क्या – 2+2 आज तो इक दौर बे मौसम चले- 2 आज तो इक दौर बे मौसम चले जब भी मैखाने से पी कर हम चले साथ ले कर सेंकड़ों आलम चले – 2 - कामिल चांदपुरी  

NAINA RE NAINA_MEHANDI HASAN_LYRIC-YUNUS HAMDAM

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NAINA RE NAINA_MEHANDI HASAN_LYRIC-YUNUS HUMDAM   नैना रे नैना तुम्ही बुरे-२ , तुमसे बुरा न कोई ss नैना रे नैना तुम्हे बुरे आप ही प्रीत लगा s ए s रे s पगले , आप ही बैठा रोये ए sss हो ssss नैना रे नैना तुम्ही बुरे s ----- सूना दिन है सूनी रातें , सूना जग है मीत बिना ss, सूनी रिमझिम की बरसातें , सूना सावन गीत बिना ss , जो दिल टूटे sss वो दिल जाने , और ना जाने कोये ss ए ss हो sss नैना रे नैना तुम्ही बुरे , तुमसे बुरा न कोई नैना रे नैना तुम्हे बुरे ss ----- पल दो पल का साथ सुहाना , जीवन भर का रोना ss है , कोई न जाने इस जीवन में , अब आगे क्या होना ss है , मीत किसी को sss मन का मिले और कोई सब कुछ खोये ss , नैना रे नैना तुम्ही बुरे , आप ही प्रीत लगाए पगले और आप ही बैठा रोये , नैना रे नैना तुम्ही बुरे ----- NI._ RE MA

SHAYARI

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                  #Shayari, तेज़ हो जाता है ख़ुशबू का सफ़र शाम के बाद ! फूल इस शहर मे खिलते हैं मगर शाम के बाद !! मेरे बारे मे कोई कुछ भी कहे सब मंज़ूर ! मुझको रहती ही नहीं अपनी ख़बर शाम के बाद !! - कृष्ण बिहारी नूर  
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                     सीने मे तूफान दबाना पड़ता है ! आँखों को अंजान बनाना पड़ता है !! उनका क्या है निकल पड़े हैं बेपरदा ! हमको तो ईमान बचाना पड़ता है !! - विजय तिवारी  

SHAYARI-2

आसमां उसका ज़मीं उसकी सितारे उसके ! रौशनी देते हैं आँखों को नज़ारे उसके !! उसकी मर्ज़ी है डुबो दे के बचा ले मुझको ! कश्तीयां उसकी भँवर उसके कनारे उसके !! ~ नय्यर जलालपुरी    

SHAYARI-1

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                    तेरी निगाह-ए-मस्त से मैख़ाना बन गया ! जिसने भी देखा तुमको , वो दीवाना बन गया !! तेरे रुख़-ए-जमाल पर जिसकी नज़र पड़ी ! वो तेरे शम्म-ए-हुस्न का परवाना बन गया !! ~ डी सी पांडे नज़र  
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आज डॉ. परिपूर्णा नंद वर्मा मेमोरियल सोसाइटी, कानपुर के तत्वावधान में आयोजित भजन संध्या एवं सम्मान समारोह अत्यंत गरिमामय एवं स्मरणीय रहा। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध ग़ज़ल व भजन गायक प्रदीप श्रीवास्तव ने देशभक्ति के गीतों, मधुर भजनों और भावपूर्ण ग़ज़लों की प्रस्तुति से ऐसा सुरमय वातावरण रचा कि पूरा सभागार तालियों की गूंज से भर उठा। उनकी गायकी ने कार्यक्रम में एक आनंदमय, उल्लासपूर्ण और भावनात्मक माहौल बना दिया, जिसे उपस्थित श्रोताओं ने खूब सराहा और भरपूर आनंद लिया। यह संध्या संगीत, भक्ति और संस्कृति के सुंदर संगम के रूप में लंबे समय तक स्मृतियों में बनी रहेगी। 🙏🎶