शायरी

चलो फिर से मुकद्दर आजमाया जाए !
किसी को अपने दिल में बसाया जाए !!
बहुत भटका किए हैं जिसकी तलाश में
उसी के कसीदे में कोई गीत गाया जाए !!
-राकेश नमित

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