SHAYARI - FIR AAJ KOI GHAZAL


फिर आज कोई गज़ल तेरे नाम ना हो जाए !
आज कही लिखते लिखते शाम ना हो जाए !!
कर रहे है इंतज़ार तेरे इज़हार--मोहब्बत का !
इसी इंतज़ार मे ज़िंदगी तमाम ना हो जाए !!


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