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HUZUR SAHEB AMRIT WACHAN_PART-1A_15-08-2001_

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HUZUR SAHEB AMRIT WACHAN_PART-1A_15-08-2001_ पूज्य्नीय गुरुवर हज़रत मंज़ूर आलम शाह ' कलंदर मौजशाही ' ' हुज़ूर साहेब ' अपने जीवन काल में हर चौमासे पर चिल्ला पूर्ण होने के बाद महफ़िल और नियाज़ का आयोजन करवाते थे | उस दौरान हुज़ूर साहेब अपने आशिक़ और अपने मुरीदों को अमृतवचन से नवाज़ते थे | आप के अमृत वचन जीने का एक सहारा बन गए हैं |  इसी क्रम में 15 AUGUST 2001 में हुज़ूर साहेब ने अपने अमृतवचन से अपने आशिक़ों और मुरीदों को जो कहा वो आपकी ख़िदमत में पेश है और इसे बार बार सुने अपने इस अमूल्य जीवन में एक नई ऊर्जा पैदा करें | https://youtu.be/zkaydeaQN5E

HUZUR SAHEB AMRIT WACHAN_PART 1B_20, DECEMBER, 2000_

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पूज्यनीय गुरुवर हज़रत मंज़ूर आलम शाह ' कलंदर मौजशाही ' ' हुज़ूर साहेब ' के अमृतवचन – 1B, 20.12.2000 https://youtu.be/3ax0YU_GiVY

HUZUR SAHEB AMRIT WACHAN_PART 1A_20, DECEMBER, 2000_

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हुज़ूर साहेब के अमृतवचन भाग 1A दिनांक 20-12-2000:-   सुप्रसिद्ध सूफ़ी संत हज़रत मंज़ूर आलम शाह 'कलंदर मौजशाही' द्वारा अपने जीवन काल में जो ख़ास मौकों पर जो जीने की राह हम सबको दिखाई है वही अमृतवचन आप सब की ख़िदमत में पेश हैं | आप सुने और उससे एक नई ऊर्जा ग्रहण करें | https://youtu.be/LXprsDZKQ 6 w

Main Sattar Ka Hun_मैं नशे में हूँ_Jagjit Singh Live At Dubai

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MAIN SATTAR KA HUN_MAIN NASHE ME HUN_JAGJIT SINGH LIVE IN  DUBAI ठुकराओ या अब के प्यार करो मैं नशे में हूँ जो चाहो मेरे यार करो मैं नशे में हूँ Movie/Album: अ जर्नी ( 1999) Performed By: जगजीत सिंह Music By: जगजीत सिंह Lyrics By: शाहिद कबीर https://youtu.be/ZS-OC9v8BWo

shayari

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 हमने मुस्कुराकर दर्द में जीना सीख लिया लोग सोचने लगे हमें तकलीफ नहीं होती #Prograame at Residence of Dr. Pawan Mishra जब तक एक दूसरे की मदद करते रहेंगे , तब तक कोई भी नही गिरेगा चाहे व्यापार हो , परिवार हो या फिर समाज ! सिमट ना  पाए वो उलझे अल्फ़ाज़ हूँ मैं , ज़िन्दा ज़मीर हूँ इसलिए बुलंद आवाज़ हूँ मैं ! सच को सुनने का कलेजा नहीं होता सब का। बात अपनी कहीं बेकार ना हो , कुछ ना कहो। - Wasif Yaar लाजमी है तेरा ख़ुद पर गुरूर करना , हम जिसे चाहें वो मामूली हो भी नहीं सकता ! मरना लगा रहेगा यहाँ जी तो लीजिए , ऐसा भी क्या परहेज़ , ज़रा-सी तो लीजिए। - दुष्यंत कुमार इश्क़ का ज़ौक़-ए-नज़ारा मुफ़्त में बदनाम है हुस्न ख़ुद बे-ताब है जल्वा दिखाने के लिए ! - असरार-उल-हक़ मजाज़ एक जंगल है तेरी आँखों में , मैं जहाँ राह भूल जाता हूँ। तू किसी रेल सी गुज़रती है , मैं किसी पुल सा थरथराता हूँ। - दुष्यंत कुमार --- ---

Kisko Qatil Main Kahun_ Jagjit Singh Live At Dubai

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किस को क़ातिल मैं कहूँ किस को मसीहा समझूँ सब यहाँ   दोस्त ही बैठे हैं किसे क्या समझूँ वो भी क्या दिन थे के   हर वहम यक़ीं   होता था अब हक़ीक़त नज़र आए तो उसे क्या समझूँ दिल जो टूटा तो कई हाथ दुआ को उट्ठे ऐसे माहौल में अब किस को पराया समझूँ ज़ुल्म ये है के   है यकता   तेरी बेगानारवी लुत्फ़ ये है   के   मैं अब तक तुझे अपना समझूँ ( यकता = अनुपम , अद्धितीय , बेजोड़) , ( बेगानारवी = परायापन) - अहमद नदीम क़ासमी https://youtu.be/eLeMLEef6Vc

HUZUR SAHEB AMRIT WACHAN_8A_12-08-2000_

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हुज़ूर साहेब के अमृतवचन भाग 8A, 12-08-2000 https://youtu.be/bgBn9UX_lBg