Shayri

सुप्रभात,
महकते फूल सुंदर तितलियां अच्छी नही लगती !
उन्हें हंसते घरों की बस्तियां अच्छी नही लगती !!
कभी तो मुस्कराहट की चमकती धूप फैलाओ !
ये आंखों से बरसती बदलियां अच्छी नही लगती !!
संकलन:
प्रदीप श्रीवास्तव
ग़ज़ल गायक

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