SHAYARI 17-06-2023

सहरा में जब भी ख़ुद को पुकारा तो डर लगा,

थे  क़ाफ़िले  की  भीड़ में  तनहा तो डर लगा।

पर्दा  रहा तो देखने की आरज़ू रही,

हटने का बस गुमान हुआ था तो डर लगा।

- स्वरुप


सोने वालों को क्या ख़बर हिज्र !

क्या हुआ एक शब में क्या हुआ !!

- साकिब लखनवी

For Prog. +91 9140886598

बिनती है हाथ जोड़ के आलम पनाह से !

बचिये दिलों को तोड़ने वाले गुनाह से !!

-असद अजमेरी

For Prog. +91 9140886598

चाहता  कोई  नहीं  साहिबे  इमां  होना !

दौरे हाजिर में हुआ जुर्म अब इंसां होना !!

रुबरु  हो  के  तेरा  मुझसे   पशेमां   होना !

आके पहलू में वो जुल्फों का परेशां होना !!

- शंकर शरण काफ़िर

For Prog. +91 9140886598


बोसा देने में जो पूछा कि क्या बिगड़ता है,

बोले आप ही कहो कि लेने में क्या मिलता है !!

For Prog. +91 9140886598

कौन छूकर गुज़रा की खिले जाते हैं,

इतने सरशार तो पहले थे होटों के गुलाब !

For Prog. +91 9140886598 


 






 

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