LYRIC_APNE HOTON PAR SAJANA CHAHTA HUN_QATEEL SHIFAI

APNE HOTON PE SAJANA CHAHTA HUN

अपने होटों पर सजाना चाहता हूँ - 
 तुझे मैं गुनगुनाना चाहता हूँ 
अपने होटों पर सजाना चाहता हूँ

.........
कोई आंसू तेरे दामन पर गिरा कर - 
बूँद को मोती बनाना चाहता हूँ - 
अपने होटों पर सजाना चाहता हूँ
.........
थक गया मैं करते करते याद तुझको - 
अब तुझे मैं याद आना चाहता हूँ -  
अपने होटों पर सजाना चाहता हूँ
.........
छा रहा है सारी बस्ती में अँधेरा - 
रौशनी को घर जलना चाहता हूँ -  
अपने होटों पर सजाना चाहता हूँ
.........
आख़िरी  हिचकी तेरे ज़ानो पे आये - 
मौत भी मैं शायराना चाहता हूँ - 
अपने होटों पर सजाना चाहता हूँ
 तुझे मैं गुनगुनाना चाहता हूँ 
अपने होटों पर सजाना चाहता हूँ
हूँ...हूँ...हूँ...हूँ...

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- क़तील शिफ़ाई


 

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