MOHABBAT KARNE WALE KAM NA HONGE_LYRIC_HAFEEZ HOSHIYARPURI
मोहब्बत करने वाले कम न होंगे
तिरी महफ़िल में लेकिन हम न होंगे
मोहब्बत करने वाले कम न होंगे
-----
ज़माने भर के ग़म या इक तिरा ग़म
ये ग़म होगा तो कितने ग़म न होंगे
तिरी महफ़िल में लेकिन हम न होंगे
मोहब्बत करने वाले कम न होंगेss
-----
अगर तू इत्तिफ़ाक़न मिल भी जाए
तिरी फ़ुर्क़त के सदमे कम न होंगे
तिरी महफ़िल में लेकिन हम न होंगे
मोहब्बत करने वाले कम न होंगेss
-----
दिलों की उलझनें बढ़ती रहेंगी
अगर कुछ मशवरे बाहम न होंगे
तिरी महफ़िल में लेकिन हम न होंगे
मोहब्बत करने वाले कम न होंगेss
-----
'हफ़ीज़' उन से मैं जितना बद-गुमाँ हूँ
वो मुझ से उस क़दर बरहम न होंगे
तिरी महफ़िल में लेकिन हम न होंगे
मोहब्बत करने वाले कम न होंगेss
-----
- हफ़ीज़ होशियारपुरी
फुरकत - दूरी, विरह
बाह्यम - मिलजुलकर, आपस मे
बदगुमा- खराब, निकम्मा
बरहम - तितर बितर, इधर उधर
Comments
Post a Comment