AAJ KI SHAYARI-25-04-2026
तेरी दास्ताँ-ए- हयात को लिखूं किस गजल के नाम सा,
तेरी शोखियाँ भी अजीब, तेरी सादगी भी कमाल...
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मुझें छोड़कर वो खुश हैं, तो शिकायत कैसी,
अब मैं उन्हें खुश भी न देखूं तो मोहब्बत कैसी !!
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मैं खुद में ढूंढता हूँ बहोत मुझको,
पर हर बार कोई और मिल जाता है।।
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ख़्वाहिश ऐसी कि आसमान तक जा सको !
दुआ ऐसी कि ख़ुदा को पा सको !!
जीने के लिए पल बहुत कम है !
जियो ऐसे कि हर पल मे जिंदगी पा सको !!
~ डी सी पांडे "नज़र"
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नज़र से अपनी नज़र क्या मिला गया कोई !
तमाम उम्र को अपना बना गया कोई !!
मुझे शराब कि ख़्वाहिश नहीं रही साक़ी !
नज़र मिला के नज़र से पिला गया कोई !!
~ डी सी पांडे नज़र
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यूं न रह रह कर हमे तड़पाइये !
आइये आ जाइए !!
क्यूंकि मेरी दुनिया मुंतज़िर है आपकी !
अपनी दुनिया छोड़ कर आ जाइए !!
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तेरा दीवाना तुझे याद किया करता है !
हक़ मोहब्बत का बहरहाल अदा करता है !!
हारता है कभी दामन को सिया करता है !
नाम लेता है तेरा और जिया करता है !!
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पहले माहौल मोहब्बत का बनाया जाये !
फिर कोई शेर मेरा सुनाया जाये !!
रात खो न जाये नफ़रत की कहीं बाहों मे !
प्यार का दीप हर एक शाम जलाया जाये !!
~ डी सी पांडे नज़र
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तेरी निगाह-ए-मस्त से मैख़ाना बन गया !
जिसने भी देखा तुमको, वो दीवाना बन गया !!
तेरे रुख़-ए-जमाल पर जिसकी नज़र पड़ी !
वो तेरे शम्म-ए-हुस्न का परवाना बन गया !!
~डी सी पांडे नज़र
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उनको जब बेनक़ाब देखा है !
रात मे आफ़ताब देखा है !!
जब वो आए तो ये हुआ महसूस !
बज़्म मे माहताब देखा है !!
~ डी सी पांडे नज़र
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आसमां उसका ज़मीं उसकी सितारे उसके !
रौशनी देते हैं आँखों को नज़ारे उसके !!
उसकी मर्ज़ी है डुबो दे के बचा ले मुझको !
कश्तीयां उसकी भँवर उसके कनारे उसके !!
~ नय्यर जलालपुरी
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सीने मे तूफान दबाना पड़ता है !
आँखों को अंजान बनाना पड़ता है !!
उनका क्या है निकल पड़े हैं बेपरदा !
हमको तो ईमान बचाना पड़ता है !!
- विजय तिवारी
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