LYRIC_KHUDA KARE KI MOHABBAT MEIN YE MAQAAM AAYE_SHAYAR-TASLEEM FAZLI

KHUDA KARE KI MOHABBAT ME_TASLEEM FAZLI

ख़ुदा करे कि मोहब्बत में ये मक़ाम आए - २

किसी का नाम लूँ लब पे तुम्हारा नाम आए

ख़ुदा करे कि मोहब्बत में ये मक़ाम आए

ख़ुदा करे ss

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कुछ इस तरह से जिए ज़िंदगी बसर न हुई - २

तुम्हारे बा'द किसी रात की सहर न हुई

सहर नज़र से मिले ज़ुल्फ़ ले के शाम आए

किसी का नाम लूँ लब पे तुम्हारा नाम आए

ख़ुदा करे कि मोहब्बत में ये मक़ाम आए

ख़ुदा करे ss

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ख़ुद अपने घर में वो मेहमान बन के आए हैं

सितम तो ये है कि अंजाम बन के आए हैं

हमारे दिल की तड़प आज कुछ तो काम आए

किसी का नाम लूँ लब पे तुम्हारा नाम आए

ख़ुदा करे कि मोहब्बत में ये मक़ाम आए

ख़ुदा करे ss

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वही है साज़ वही गीत है वही मंज़र

हर एक चीज़ वही है नहीं हो तुम वो मगर

उसी तरह से निगाहें उठें सलाम आए

किसी का नाम लूँ लब पे तुम्हारा नाम आए

ख़ुदा करे कि मोहब्बत में ये मक़ाम आए

ख़ुदा करे ss

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शायर: तस्लीम फ़ाज़ली / स्वर: मेहंदी हसन


 

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