ISHQ JAB EK TARAF HO TO SAZA DETA HAI_LYRIC_HASRAT JAIPURI
ISHQ JAB EK TARAF HO TO_HASRAT JAIPURI
Lyricist: Hasrat Jaipuri
Singer: Hussain Brothers
इश्क गर एक तरफ़ हो तो सज़ा देता है-2
और जब दोनों तरफ़ हो तो मज़ा देता है !
इश्क गर एक तरफ़ हो तो सज़ा देता है
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अपने माथे पे ये बिंदिया की चमक रहने दो- 2
ये सितारा मुझे मंज़िल के पता देता है- 2
और जब दोनों तरफ़ हो तो मज़ा देता है !
इश्क गर एक तरफ़ हो तो सज़ा देता है
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ऐ नमकपाश तेरी साँवली सूरत की क़सम- 2
दिल का हर ज़ख़्म तुझे दिल से दुआ देता है – 2
और जब दोनों तरफ़ हो तो मज़ा देता है !
इश्क गर एक तरफ़ हो तो सज़ा देता है
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तू मुझे प्यार से देखे या न देखे ज़ालिम- 2
तेरा अंदाज़ मोहब्बत का पता देता है – 2
और जब दोनों तरफ़ हो तो मज़ा देता है !
इश्क गर एक तरफ़ हो तो सज़ा देता है
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आग में आग लगाता है सुलगते दिल को- 2
जब वो मिलता है तो दामन से हवा देता है – 2
और जब दोनों तरफ़ हो तो मज़ा देता है !
इश्क गर एक तरफ़ हो तो सज़ा देता है
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मैं किसी ज़ाम का मोहताज नहीं हूँ ‘हसरत’- 2
मेरा साकी मुझे आँखों से पिला देता है
और जब दोनों तरफ़ हो तो मज़ा देता है !
इश्क गर एक तरफ़ हो तो सज़ा देता है
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