शायरी

जब  ख़ुदी  से ही किनारा कर लिया !
ख़ुद को ही अपना सहारा कर लिया !!
जब  सज़ा  में  ही  मज़ा  आने लगा !
जुर्म  पिछला  ही  दुबारा कर लिया !!
~शेषधर तिवारी

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