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आप चींटी नहीं विवेकपूर्ण इंसान हो।
यदि आप 100 काली चींटियों और 100 लाल चींटियों को इकट्ठा करते हैं और उन्हें कांच के जार में डालते हैं, तो कुछ भी नहीं होगा, लेकिन अगर आप जार को जोर से हिंसक रुप में हिलाएं और इसे मेज पर छोड़ दें, चींटियां एक दूसरे को मारना शुरू कर देंगी। रेड्स मानते हैं कि काला दुश्मन है, जबकि ब्लैक का मानना है कि लाल दुश्मन है जब असली दुश्मन वह व्यक्ति है जिसने जार को हिला दिया है। समाज में भी यही बात लागू होती है।
पुरुष बनाम महिला
हिंदू बनाम मुस्लिम
दलित बनाम सवर्ण
वाम बनाम अधिकार
अमीर बनाम गरीब
आस्था बनाम विज्ञान
गपशप, अफवाहें,
आदि .......
आज इसी जार रुपी हमारे भारत देश को कुछ लोगों द्वारा हिलाया जा रहा है और नफ़रत का बीज बोया जा रहा है। इससे पहले कि हम एक-दूसरे से लड़ें, हमें खुद से पूछना चाहिए: जार को किसने हिलाया? विचार करें क्योंकि आप चींटी नहीं विवेकपूर्ण इंसान हो।
यह अकाट्य सत्य है, ऐसा करके लोग अपना सर्वार्थ सिद्ध करते हैं और शान्ति प्रिय निर्गदोष नागरिक पिसते हैं।
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