धार्मिक चित्रों एवं नामो का व्यवसायी करण



भारत में लगभग 3 लाख मस्जिदें, अकेले दिल्ली में 271 चर्च हैं लेकिन कहीं भी इनके धर्म के नाम पर कोई दुकान या खाद्य या अन्य उपयोगी वस्तुओं पर इनके धर्म का चिन्ह , नाम आदि नहीं देखा | ये उनकी धर्म के प्रति सम्मान और आस्था है | जब कि ठीक इसके विपरीत हिन्दू धर्म में कुछ दुकानों, प्रतिष्ठानों एवं अन्य सामग्री आदि पर निम्न नामो से व्यापार करते देखा जैसे : शंकर छाप तंबाकूबजरंग पान भंडार, गणेश छाप बीडीलक्ष्मी छाप पटाखे ,राम बूट हाउस, लक्षमण लेदर स्टोर्स,माँ वैष्णो लस्सी भंडार, कृष्णा  बार ऐंड रेस्टारेंट, जय माँ अम्बे होटल ( चाय नाश्ता ) आदि |
इस तरह के प्रोडक्ट और दुकाने आपको हर जगह पर दिखाई देंगे | दुःख इस बात का है कि उपयोग के बाद उन प्रोडक्ट के रैपर, डिब्बा आदि को कचरे में फेंक देते है | इससे हमें और हमारे जैसे लाखों करोड़ों हिन्दुओं को को बहुत तकलीफ होती है |  
 जब की इसके विपरीत आज तक मैंने अल्लाह छाप गुटका खुदा छाप बीडी , ईसा मसीह छाप तंबाकू आदि बिकते नहीं देखा ।  मुसलमान और ईसाई से हिन्दू यह सीखे की अपने धर्म के प्रति आस्था कैसे की जाती है और धर्म का सम्मान कैसे किया जाता है हमारा मानना है की इस व्यय्सायी कारन को संसद में बिल / विधेयक लाकर भगवान् के नाम और उनके प्रतीक चिन्हों का व्यावसायिक उपयोग पर प्रतिबन्ध लगाया जाय | यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण और उचित कदम होगा |  

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