Mushaira - Ghamo Ki Sardiyon Mein - ग़मो की सर्दियों मे भी सुकूं की धूप ...



कभी राँझा,
कभी मजनू, कभी फ़रहाद का
मौसम !
हज़ारों रंग जीता है दिल-ए-बरबाद का मौसम !!
ग़मो की सर्दियों में भी सुकूं की धूप खिलती है !
हमारे साथ रहता है तुम्हारी याद का मौसम !!
~ नीना सहर
( पूरी शायरी के लिए नीचे दिए गए यू ट्यूब लिंक पर क्लिक करें
| और हाँ SUBSCRIBE करना न भूलें  )
https://youtu.be/_lt96jcqzuo

Comments

Popular posts from this blog

MOHABBAT KARNE WALE KAM NA HONGE_LYRIC_HAFEEZ HOSHIYARPURI

LYRIC_KHUDA KARE KI MOHABBAT MEIN YE MAQAAM AAYE_SHAYAR-TASLEEM FAZLI

LYRIC_AGAR HAM KAHEN AUR WO MUSKURA DE_SUDARSHAN FAQIR