शायरी - भृकुटि अनोखी

भ्रकुटि अनोखी चंचल चितवन अनुपम रूप तुम्हार !
बृज वनिताओं ने कन्त त्याग दिये नटवर नन्द कुमार !!
~अभिलाष

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