Ghazal - Uthaya Chand ka

//गजल //
उठाया चाँद का घूघट वो शरमाया दुहाई है
झुकाकर झील सी आंखे वो मुस्काया दुहाई है।
वो अरमानों की बारातें मेरे साँसों की शहनाई
मिरे धड़कन के तारों को वो झनकाया दुहाई है ।
मिटाकर रेत के मेरे घरौंदे खुश बहुत था वो
जो उनके शीश महलों पर कहर आया दुहाई है।
वो खिड़की पर नजर आना झटककर दूर हो जाना
जो आँचल डालकर कंधे पे सरकाया दुहाई है ।
वो उसकी शोख सी नज़रें मगर लब पर कि खामोशी
गिरे रुख्सार  पर गेसू जो बलखाया दुहाई है।
#चित्रगुप्त

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