-:: दूसरी कोरोना लहर कहीं भारत के विरुद्ध सुनियोजित जैविक युद्ध तो नहीं है ? ::

 

-::  दूसरी कोरोना लहर कहीं भारत के विरुद्ध सुनियोजित जैविक युद्ध तो नहीं है ? ::-

 

क्या आप मानते हैं कि भारत में वर्तमान में फैली हुई महामारी की दूसरी लहर वायरस के सामान्य रूप से फैलने के कारण आई है? एक पखवाड़े पहले तक मैं यही मानता था कि यह दूसरी लहर है, पर अब बहुत गहरा संदेह घर कर गया है मेरे मन में।

 

आप संपूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप की स्थिति देखिए।‌ पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान। इन देशों में या एशिया के किसी अन्य देश में कोई दूसरी लहर नहीं आई। आज वहाँ वैसी ही स्थितियाँ हैं जैसी स्थितियाँ दो-ढाई महीने पहले भारत में थीं। फिर यह बम भारत में ही कैसे फटा? क्या उन सभी देशों के नागरिक भारतीयों से बहुत अधिक अनुशासित हैं? क्या वे महामारी से बचने के लिए चौबीस घंटे मास्क पहने रहते हैं? नहीं! क्या उनकी भौगोलिक स्थिति भारत से भिन्न है? नहीं! फिर, दूसरी लहर इन देशों को छू भी नहीं सकी और भारत को तोड़ रही है, क्यों?

 

आईसीएमआर पहली वेव के समय कह चुकी है कि भारत में करोड़ों लोगों को यह बीमारी हो गई और उन्हें पता भी नहीं चला तो जब करोड़ों लोग इसे झेल गए, उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता बन गई तब दूसरी लहर इतनी खतरनाक कैसे हो गई ? और केवल भारत में ही क्यों हुई?

 

आप इस महामारी के पश्चात् की वैश्विक परिस्थितियों को देख लीजिए। दवा, वैक्सीन से लेकर अर्थव्यवस्था प्रबंधन तक। भारत ने पूरी दुनिया को चकित किया। और अब चीन की असल चिंता को समझिए।‌ चीन आज भारत को मदद की बात कर रहा है। पिछले साल महामारी काल में भी घुसपैठ कर रहा था। वहाँ लात खाने के पश्चात् वह इतना सुधर गया कि हमारी मदद करने लगा????

 

पाकिस्तान जैसा चिरशत्रु और लंगड़ा मदद की बात कर रहा है।

 

एक अत्यंत महत्वपूर्ण कारण यह दिखाई दे रहा है कि ट्रंप की तरह मोदी झुक नहीं रहा है।

 

विश्व की फार्मा लाॅबी, ऑयल लाॅबी और आर्म्स लॉबी ने इस महामारी और

BlackLivesMatter तथा

जॉर्ज फ्लाॅयड मुद्दों का मीडिया में भयानक उफान मचाकर ट्रंप को हराया। क्योंकि ट्रंप इन लॉबीज के सामने खुलकर आ खड़े हुए थे। आज वही लोग मोदी के पीछे लगे हैं।

 

जानते है क्यों? क्योंकि...

... फार्मा कंपनियों का बिजनेस कम से कम 4 से 6 ट्रिलियन डॉलर (सालाना) का है। कम से कम 1.25 ट्रिलियन डॉलर का वैक्सीन बिजनेस जीरो कर दिया गया। 500 बिलियन डॉलर का PPE Kit और मास्क का बिजनेस लगभग जीरो कर दिया गया।

 

भारत की मेडिकल के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता से किसको हानि हो रही थी। हमेशा हाथ फैलाने वाला देश वैक्सीन बाँटने वाला देश कैसे हो गया, किसे यह बात पच नहीं रही थी ? जर्मनी जैसे देश की यह पीड़ा जानिए कि ड्रग के क्षेत्र में भारत ने हमें कैसे पछाड़ दिया, फिर विचारिये।

 

और आगे चलें...

...अगले 2 - 3 सालों में भारत में इलॅक्ट्रिक वाहनों के लिए 75000 से 100000 चार्जिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं जिससे तेल की खपत 30% तक कम हो जाएगी। वैश्विक ऑयल लॉबी के मुँह पर यह करारा तमाचा है।

 

यही नहीं...

...भारत ने LCA लड़ाकू विमानों का व ब्रह्मोस मिसाइल का निर्यात चालू कर दिया है जो वैश्विक आर्म्स लॉबी के लिए तगड़ा झटका साबित हो रहा है।

 

मोदी इन सभी की राह में बहुत बड़ा काँटा है...

...और यह मानकर चला जा रहा है कि इस काँटे को जनता के गुस्से से ही हटाया जा सकता है।

 

एक और पहलू...

अधिकतर लोग अब असम और पश्चिम बंगाल के चुनावों में मोदी की रैलियों और प्रचार को लेकर गुस्से में दिखाये जा रहे हैं। किंतु

उन्हें जिओ पॉलिटिक्स की समझ ही नहीं है।

पश्चिम बंगाल में 1.5 करोड़ बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं व असम में भी कई लाख घुसपैठिये मेहमान बनाये जा चुके हैं।

( दीदी और गांधी ने सबके आधार कार्ड भी बनवा दिए हैं।)

 

असम व बंगाल भारत के लिए कश्मीर की तरह, शायद उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है।

 

गूगल पर चिकन नेकसर्च करिए।

 

आप मानें या ना मानें पर भारत में चीनी बीमारी की दूसरी लहर मोदी को हर मोर्चे पर विफल करने और देश में सिविल वार करवाने के लिए ही लायी गयी है।

 

यह चीन और भारत में छिपे बैठे उसके स्लीपर सेल के माओवादियों का खतरनाक खेल है...

 

विपक्षनीत सरकारों की मोदी सरकार के विरुद्ध महामारी सम्बन्धी नीच राजनीति व मीडिया का 24x7 लाशें व ऑक्सीजन की कमी दिखाना इस षड्यंत्र का ही हिस्सा है।

 

एक ही माँ सैकड़ों की माँ बन कर क्यों मर रही है ?

 

केवल श्मशान में ही भीड़ क्यों ??

 

एक ही जैसे 70 ट्वीट क्यों- कि हमारी अम्मा मर गयी बिना ऑक्सीजन के ??

 

टूल किट गैंग फिर से सक्रिय किसके इशारे पर ?

 

अचानक से किसान भी लौट आये बॉर्डर पर ?

 

जैसे ही महाराष्ट्र में वसूली कांड सामने आया, मोदी बंगाल जीतते लगे...

... महामारी फिर से कैसे प्रकट हो गयी ???

 

भैया यह एक षड्यंत्र ही है, मानो न मानो !!

 

यह एक बहुत बड़ा युद्ध हो सकता है! मैं कोई विशेषज्ञ नहीं हूँ पर स्थितियाँ देखिए और सोचिए कि अचानक यह केवल भारत के साथ ही क्यों हुआ...

 

यह एक विकट जैविक अस्त्र हो सकता है!!!

 

थोड़े-थोड़े अंतराल के बाद यह लड़ाई बहुत आगे तक जाने वाली है।

 

अगर अगली पीढ़ी को गुलाम नहीं बनाना है तो हर हाल में...

...आपको क्या करना है इस बारे में आप स्वयं भली-भाँति समझते हैं।

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