SHAYRI

सुप्रभात,
 मेरे पीर हज़रत शाह मंज़ूर आलम को समर्पित ये शेर :

दिल में जिगर में आँख में बस तू ही तू रहे !
तेरे सिवा न और कोई दूसरा रहे !!
इस इल्तिज़ा के बाद कोई आरज़ू नहीं !
मेरा सनम हमेशा मेरे रूबरू रहे !! 
संकलन 
प्रदीप श्रीवास्तव 

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