आँख उस ने मिलाई तड़प उट्ठा दिल-ए-मुज़्तर ! Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps - December 01, 2016 शुभ रात्रि, आँख उस ने मिलाई तड़प उट्ठा दिल-ए-मुज़्तर ! ताका था कहीं और पड़ा तीर कहीं और !! मैं अक्स हूँ आईना-ए-इमकाँ में तुम्हारा ! तुम सा जो नहीं और तो मुझ सा भी नहीं और !! ~ जलील मानिकपूरी Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
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