SHAYRI

साक़ीया जाएँ कहाँ हम तेरे मैख़ाने से !
शहर के शहर नज़र आते हैं वीराने से !!
जोड़ कर हाथ ये साक़ी है गुज़ारिश मेरी !
मुझको आँखों से पिला ग़ैर को पैमाने से !!
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