शायरी

दिल को चुरा के यार का अब यूँ न जाइए !
नजराना दे के प्यार का अव यूँ न जाइए !!
गुजरेगी क्या दीवानों पे सोचा है आपने !
मौसम है ये बहार का अब यूँ न जाइए !!
~ नज़ीर बनारसी
संकलन

प्रदीप "रौनक़"

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