BHAJAN, MAA - HE JAGDAMBE AMBE HE


MAA - HE JAGDAMBE AMBE HE

जगदम्बे जब तुम्हें बुलाऊँ मेरे भी घर आना !

चरणों की तुम धुल से मेरे, घर को स्वर्ग बनाना !!

भजन

हे जगदम्बे अम्बे हे कल्याणी दुर्गे मैया,

तेरी किरपा हो तो मेरी पार हो जीवन नैया !

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जनम जनम का तेरा मेरा रिश्ता है जगदम्बे !

हर पल मेरे मन में रहना, दूर न रहना अम्बे ,

( इसी लिए तो मन में मेरे रहती है तू  अम्बे )

धूप है दुःख की मुझ पे कर, अपने आँचल की छईयां,

तेरी किरपा हो तो मेरी पार हो जीवन नैया !

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जीवन की राहों में कांटे ही कांटे हैं माता,

एक पग भी चलना मुश्किल है, मन मेरा घबराता,

गिर न जाऊं बीच डगर में, थाम ले मेरी बइयाँ,

तेरी किरपा हो तो मेरी पार हो जीवन नैया !

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मेरी आँखों ने देखा जो पूरा कर दे सपना,

सपनो में ही लेकिन अम्बे दर्शन दे दे अपना,

तेरा सुन्दर रूप निहारूं ले के तेरी बलैयां,

तेरी किरपा हो तो मेरी पार हो जीवन नैया !

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जिसने जो माँगा है तेरे दर से उसने पाया,

मैं भी अपनी अरज लगाने द्वार पे तेरे आया,

चिठ्ठी तेरे नाम लिखी है, पढ़ लेना हे मैया,

तेरी किरपा हो तो मेरी पार हो जीवन नैया !

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अपने दो नैनो से अम्बे ममता तू बरसाए,

शेर पे बैठी तू जगदम्बे धीमे से मुस्काये,

चुनरी तेरी लहराती जब चलती है पुरवैया,

तेरी किरपा हो तो मेरी पार हो जीवन नैया !

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कॉपी राइट - प्रदीप श्रीवास्तव,

रचयिता - सुशील कानपुरी

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