भर्तृहरि ने कहा था :-
धन की यह तीन गतियाँ ही होती हैं - दान, भोग और नाश . लेकिन जो न तो धन को दान में देता है और न ही उस धन का भोग करता है, उसके धन की  तीसरी गति ही होती है अर्थात उसका धन नष्ट हो जाता है !


 संकलन:

प्रदीप श्रीवास्तव,
ग़ज़ल गायक

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