SUFI - ALI WALI MAHRAAJ RE JAG KE RAJ DULARE - HAZRAT MANZOOR AALAM SHAH 'KALANDAR MAUJSHAHI'


अली वली महराज रे जग के राज दुलारे

राज का सर पे ताज रे रब के मीत पियारे

शाहे नज़फ़ तोहरी जानिब तक के

क़दमों पी तोहरे ये सर रख के

अरज करूं सरताज रे रब के मीत पियारे

अली वली महराज रे जग के राज दुलारे

राज का सर पे ताज रे रब के मीत पियारे

 

करबला वालों का सदक़ा दीजे

दया के बादल बरसा दीजे

बिनती करे मोहताज रे जग के राज दुलारे

अली वली महराज रे जग के राज दुलारे

राज का सर पे ताज रे रब के मीत पियारे

 

हमरी सुनो ही शाह जगत के

मंगता अाया द्वार पे तुम्हरे

भीख मिले महराज रे जग के राज दुलारे

अली वली महराज रे जग के राज दुलारे

राज का सर पे ताज रे रब के मीत पियारे

 

शाहे करम तोहरी देऊं दोहाई

नज़रे करम हो ऐसी तुम्हारी

बिगड़े बने सब काज रे जग के राज दुलारे

अली वली महराज रे जग के राज दुलारे

राज का सर पे ताज रे रब के मीत पियारे

 

~ हज़रत मंज़ूर आलम शाह 'कलंदर मौजशाही'


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