GHAZAL - AANKH UNKI JHUKI JHUKI SI HAI

ग़ज़ल:--
आंख  उनकी  झुकी झुकी सी है।
क्युं लगे हमको कुछ कमी सी है।।
उनके आने की क्या ख़बर आई।
वक़्त की  चाल  जो  थमी सी है।।
उनका  दीदार  हो  गया है  क्या।
क्युं  लगे  नब्ज़ यह  रुकी सी है।।
उनसे मिलने को जा रहे हो क्या।
चाल  क्युं  कर  दबी  दबी सी है।।
किसके डर से हो भाग कर आए।
सांस  क्युं कर फुली  फुली सी है।।
दिल के बदले में दिल लिया है क्या।
दिल की धड़कन बढ़ी बढ़ी सी है।।
इश्क़  लगता  है हो गया ' अंजुम'।
हर  अदा   में   जो   बेख़ुदी सी है।।
~ प्यासा अंजुम

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