SHAYARI

पर्दा तो होश वालों से किया जाता है हुज़ूर !
तुम बेनक़ाब चले आओ हम तो नशे में हैं !!
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पर्दा तो होश वालों से किया जाता है हुज़ूर !
तुम बेनक़ाब चले आओ हम तो नशे में हैं !!
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आईना फैला रहा है खुदफरेबी का ये मर्ज
हर किसी से कह रहा है आपसा कोई नहीं
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वहम से भी अक्सर टूट जाते है रिश्ते,
कसूर हर बार गलतियों का नही होता..!
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डाल कर आदत बेपनाह मोहब्बत की
अब वो कहते है कि समझा करो वक़्त नही है
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एक ही चेहरे की अहमियत हर एक नजर में अलग सी क्यूँ है,
उसी चेहरे पर कोई खफा तो कोई फिदा सा क्यूँ है
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दोस्ती करने वालों की कमी नहीं है दुनिया में,
अकाल तो निभाने वालों का पडा है साहब !!
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ख़ुद पुकारेगी जो मंज़िल तो ठहर जाऊँगा 
वर्ना ख़ुद्दार मुसाफ़िर हूँ गुज़र जाऊँगा 
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कैसे छिपाऊँ भला चाहत तेरी जुस्तजू,
जिस्म से आने लगी अब तो तेरी ख़ुशबू,
वजूद तेरे वजूद से जुड़ा तो हुआ मुकम्मल,
तुझसे मिला तो हो गया 'सरजन' सुर्ख रूह.
'सरजन'
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होते नहीं तबादले मुहब्बत करने वालो के
वो आधी रात को भी तन्हाई में तैनात मिला करते है
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जो जले थे हमारे लिऐ, बुझ रहे है वो सारे दिये,
कुछ अंधेरों की थी साजिशें कुछ उजालों ने धोखे दिये
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औरों की बुराई को न देखूँ वो नज़र दे

हाँ अपनी बुराई को परखने का हुनर दे
- खलील तनवीर
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